गज मोचन नाथ पावन स्थान पर सुहागिन महिलाओ ने की वट वृक्ष की पूजा,श्रद्धलुओं की रही काफी भीड़
गज मोचन नाथ पावन स्थान पर सुहागिन महिलाओ ने की वट वृक्ष की पूजा,श्रद्धलुओं की रही काफी भीड़
श्री न्यूज़ 24
विमलेश कुमार चौधरी
मितौली(खीरी)
कोतवाली नीमगाँव क्षेत्र के सेहरुआ के निकट गज मोचन स्थान पर भक्तो काफी भीड़ रही ।जहाँ वट सावित्री व सोमवती अमावस्या के पावन पर्व पर किया गया पूजन । कहा जाता है कि इस दिन सती सावित्री ने अपने सतीत्व के बल पर पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लिये थे । मौत के देवता यमराज को एक भारतीय नारी से पराजित होना पड़ा और उन्होंने सावित्री को सदा सुहागिन का वरदान देते हुए उन्हें पुत्र वती होने का आशीर्वाद दिया तभी से प्रति वर्ष भारत की सौभाग्यशाली स्त्रियां अपने पति परमेश्वर की लम्बी आयु के लिए बड़ी श्रद्धा भक्ति व विश्वास के साथ वट अर्थात बरगद वृक्ष की पूजा करने के पश्चात अन्न जल ग्रहण करती हैं और पति का साथ जन्मजन्मांतर तक बना रहे ऐसा ईश्वर से आशीर्वाद मांगती है । नींमगाव सिकंद्राबाद क्षेत्र से लेकर काफी दूर दराज से आते हैं भक्त। गज मोचन नाथ मंदिर पर सुबह से वट सावित्री की पूजा के लिए सैकड़ों स्त्रियों का तांता लगा रहा और साथ कुंवारी कन्याओं व सुहागिन स्त्रियों ने सोमवती अमावस्या के अवसर पर पीपल वृक्ष की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया।वही मान्यता है कि यहाँ गज और मगरमछ की लड़ाई हुई थी तब स्वयं विष्णु भगवान गज को बचाने आये थे।आज वही तीर्थ सूखा पड़ा हुआ है ।प्रशासन की लापरवाही है ।
श्री न्यूज़ 24
विमलेश कुमार चौधरी
मितौली(खीरी)
कोतवाली नीमगाँव क्षेत्र के सेहरुआ के निकट गज मोचन स्थान पर भक्तो काफी भीड़ रही ।जहाँ वट सावित्री व सोमवती अमावस्या के पावन पर्व पर किया गया पूजन । कहा जाता है कि इस दिन सती सावित्री ने अपने सतीत्व के बल पर पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लिये थे । मौत के देवता यमराज को एक भारतीय नारी से पराजित होना पड़ा और उन्होंने सावित्री को सदा सुहागिन का वरदान देते हुए उन्हें पुत्र वती होने का आशीर्वाद दिया तभी से प्रति वर्ष भारत की सौभाग्यशाली स्त्रियां अपने पति परमेश्वर की लम्बी आयु के लिए बड़ी श्रद्धा भक्ति व विश्वास के साथ वट अर्थात बरगद वृक्ष की पूजा करने के पश्चात अन्न जल ग्रहण करती हैं और पति का साथ जन्मजन्मांतर तक बना रहे ऐसा ईश्वर से आशीर्वाद मांगती है । नींमगाव सिकंद्राबाद क्षेत्र से लेकर काफी दूर दराज से आते हैं भक्त। गज मोचन नाथ मंदिर पर सुबह से वट सावित्री की पूजा के लिए सैकड़ों स्त्रियों का तांता लगा रहा और साथ कुंवारी कन्याओं व सुहागिन स्त्रियों ने सोमवती अमावस्या के अवसर पर पीपल वृक्ष की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया।वही मान्यता है कि यहाँ गज और मगरमछ की लड़ाई हुई थी तब स्वयं विष्णु भगवान गज को बचाने आये थे।आज वही तीर्थ सूखा पड़ा हुआ है ।प्रशासन की लापरवाही है ।

Post a Comment