नहर में नहीं है एक बूंद पानी किसान परेशान और सिंचाई विभाग कुंभकर्ण की नींद में सोया हुआ
नहर में नहीं है एक बूंद पानी किसान परेशान और सिंचाई विभाग कुंभकर्ण की नींद में सोया हुआ
श्री न्यूज़ 24
मयंक त्रिवेदी
कस्ता लखीमपुर
रजबहा से सीतापुर जाने वाली छोटी नहर में पानी ना होने के कारण किसानों की फसलें सूख रहीं हैं किसान अपनी फसलों को बर्बाद होते अपनी आंखों से देख रहा है और प्रशासन मूक बधिर बनके तमाशा देखता हुआ नजर आ रहा है 4 महीने हो चुके हैं नहर में पानी की एक बूंद दिखाई नहीं दे रही है नहर के आस पड़ोस के खेत पूरी तरह से बिना सिंचाई के बर्बाद होने की कगार पर खड़े लेकिन सिंचाई विभाग कुंभकरण की नींद में डूबा हुआ किसान 4 महीने से इस भारी मुसीबत का सामना कर रहे लेकिन सिंचाई विभाग किसानों की समस्या की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे आलम यह है कि किसानों के पशु भी नहर में पानी ना आने की वजह से बेहाल है वहीं दूसरी तरफ ट्यूबवेल की कम बोरिग होने की वजह से पानी नहीं उठा रहा है किसान अपनी फसल में पानी लगाने के लिए पूरी रात इंजन लेकर खेतों में रात गुजार रहे हैं आवारा पशुओं को भी पीने के लिए एक बूंद भी नहर में नहीं है आवारा पशु प्यास बुझाने के लिए तड़प रहे हैं फसलें सूख रहीं हैं फिर भी प्रसासन के कान में जू तक नहीं रेगं रही है अगर प्रशासन इसी तरह से अपनी गैर जिम्मेदारी निभाता रहेगा तो इस चिलचिलाती धूप में किसान इसी तरह से अपने खेतों में खड़ी हुई फसल को बर्बाद होते हुए देखेगा
श्री न्यूज़ 24
मयंक त्रिवेदी
कस्ता लखीमपुर
रजबहा से सीतापुर जाने वाली छोटी नहर में पानी ना होने के कारण किसानों की फसलें सूख रहीं हैं किसान अपनी फसलों को बर्बाद होते अपनी आंखों से देख रहा है और प्रशासन मूक बधिर बनके तमाशा देखता हुआ नजर आ रहा है 4 महीने हो चुके हैं नहर में पानी की एक बूंद दिखाई नहीं दे रही है नहर के आस पड़ोस के खेत पूरी तरह से बिना सिंचाई के बर्बाद होने की कगार पर खड़े लेकिन सिंचाई विभाग कुंभकरण की नींद में डूबा हुआ किसान 4 महीने से इस भारी मुसीबत का सामना कर रहे लेकिन सिंचाई विभाग किसानों की समस्या की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे आलम यह है कि किसानों के पशु भी नहर में पानी ना आने की वजह से बेहाल है वहीं दूसरी तरफ ट्यूबवेल की कम बोरिग होने की वजह से पानी नहीं उठा रहा है किसान अपनी फसल में पानी लगाने के लिए पूरी रात इंजन लेकर खेतों में रात गुजार रहे हैं आवारा पशुओं को भी पीने के लिए एक बूंद भी नहर में नहीं है आवारा पशु प्यास बुझाने के लिए तड़प रहे हैं फसलें सूख रहीं हैं फिर भी प्रसासन के कान में जू तक नहीं रेगं रही है अगर प्रशासन इसी तरह से अपनी गैर जिम्मेदारी निभाता रहेगा तो इस चिलचिलाती धूप में किसान इसी तरह से अपने खेतों में खड़ी हुई फसल को बर्बाद होते हुए देखेगा


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