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पलियाकलां।।कोटेदारों की मनमानी के आगे उपभोक्ता नतमस्तक

कोटेदारों की मनमानी के आगे उपभोक्ता नतमस्तक

श्री न्यूज़ 24
डीपी मिश्रा/राजुल गुप्ता

पलियाकलां-खीरी

नगर सहित तहसील के ग्रामीण इलाके की सरकारी सस्ते गल्ले की वितरण व्यवस्था सिर्फ दो कोटेदारो की इच्छानुसार और उनके निर्देशों के अनुसार चल रही रही है। कोटेदारों की मनमानी से उपभोक्ता परेशान हैं।
जानकार सूत्रों ने बताया कि कोटेदारों ने नागरिको को ब्लैकमेल करने के उद्देश्य से एक कोटेदार यूनियन बना रखी है। जिसमे सभी निर्णय और प्रशाशन से सांठगाँठ का जिम्मा इन्ही दो कोटेदारों पर है जब भी कोई उपभोक्ता शिकायत करता है तो ये दोनों कोटेदार प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर अपने प्रभाव और कोटेदार यूनियन के पदाधिकारी बनकर कर उपभोक्ताओं की शिकायत वही दबवा देते है और उपभोक्ता की राशन न मिल मिलने की परेशानी जस के तस और शिकायत  उच्च अधिकारीयों तक नहीं पहुँच पाती और उपभोक्ता निराश होकर इन दोनों कोटेदारो से हार कर अपने घर में चुपचाप हार मान कर बैठ जाता है और वो इसका जिम्मेदार मुख्य मंत्री और सरकार को समझ कर मन की भड़ास गालियों के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यसमंत्री और अधिकारीयों को देकर निकालता है। जब की सरकार की मंशा यह है की सरकार की प्रत्येक योजना का लाभ लाइन में खड़े अंतिम ब्यक्ति तक पहुंचे गौरतलब है अनेक उपभोक्ताओं से पूछने से पता चला की कोई भी कोटेदार विगत कई वर्षों से मिटटी का तेल अर्थात केरोसीन नहीं बाट रहे है जब भी कोई उपभोक्ता इस बाबत पूछता है तो वो कोटेदार कहते है की मिटटी का तेल आया ही नहीं .प्रश्न यह उठता है अगर केरोसीन उठा ही नहीं तो  बाजार  में कहाँ से आ जाता है और उन दुकानदारों को कहाँ से मिल जाता है जिनसे  उपभोक्ता पचास से सत्तर रुपये प्रति लीटर खरीदता है जिस उपभोक्ता को वही केरोसीन सरकारी सस्ते गल्ले के कोटेदार से नहीं मिलता है सोंचने की बात यह भी है अगर इन् कोटेदारो की मिली भगत नहीं है तो इतनी शिकायतों के बाद भी उपभोक्ता को नियमित रूप से केरोसीन आखिर क्यों नहीं दिया जा रहा जिससे लगता है कि दाल में कुछ काला है लेकिन यहां पर उसके उलट पूरी दाल ही काली है। कई समाजसेवियों ने नाम न छापने की बात पर कहा कि वह नगर की जनता से अपील करते हैं की वह राशन अथवा केरोसीन न मिलने पर मुख्यमन्त्री   के पोर्टल पर शिकायत करे जो कि फ्री नंबर है जिसे मुख्यमंत्री स्वयं चौबीस घंटे निगरानी करते है और शिकायत पर सुनवाई न होने की  स्थिति में तुरंत कार्यवाही करते है उपभोक्ता मुख्यमंत्री पोर्टल पर अपनी शिकायत कर सकते हैं। लेकिन भय में शिकायत नहीं करते सोचते हैं कि ज्यादा कानूनी कार्रवाई की तो कोटेदार चीड़ जाएगा फिर जो मिल रहा है उस पर भी ग्रहण लग जाएगा इससे कोटेदारों की तानाशाही उजागर होती है।

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