Click now

जिले में चल रहे अनेकों मानक विहीन नर्सिंग होम जिला प्रशासन जान कर भी मौन

जिले में चल रहे अनेकों मानक विहीन नर्सिंग होम जिला प्रशासन जान कर भी मौन 

स्वास्थ्य विभाग एवं आशाओं की मिलीभगत को उजागर करते यह मानक विहीन नर्सिंग होम 

श्री न्यूज़ 24
आदित्य सिंह(संपादक)

लखीमपुर-खीरी

लखीमपुर क्षेत्र में चल रहे हैं अनेकों मानक विहीन नर्सिंग होम।गिने चुने अस्पतालों के भवन ही मानक के अनुसार होंगे अधिकांश अस्पताल आवासीय भवनों के नक्शे पर संचालित किए जा रहे है।बड़ी बात ये है कि आग लगने पर या किसी अन्य आपात स्थिति से निपटने के भी इनमें पर्याप्त इंतजाम नही है।फिर भी अधिकारियों की शाह पर निडरता के साथ संचालित हैं।फायर ब्रिगेड से भी इन्हें एन ओ सी मिल जाता है।चिकित्सा विभाग भी कभी इनमे झांकने की जहमत नही उठाता।सुरक्षा मानकों के अनुसार बेसमेंट में अस्पताल संचालित नही किया जा सकता पर संचालित है।आए दिन होती है मरीजों की मौत या किसी गंभीर समस्या का सामना करने को होते हैं मजबूर। इन्हीं नर्सिंग होम्स ने डॉक्टर के पेशे को रुपए कमाने का धंधा बना लिया अनजान मरीज जिला अस्पताल से होते हैं आशाओं के द्वारा निजी नर्सिंग होम में भर्ती कहना गलत ना होगा की स्वास्थ्य विभाग ,आशाओं वा दलालों के सहयोग से नर्सिंग होम्स का हो रहा है भरण पोषण अनेकों विसंगतियों एवं कमियों के होने के बावजूद धड़ल्ले से चल रहे हैं निजी अस्पताल। मरीजों से मोटी रकम की उगाही की जा रही पर सब कुछ जानने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे पड़ा है स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की वजह से ही पूरी निडरता के साथ संचालित है यह जानलेवा निजी अस्पताल मरीजों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।

आपको बताते चलें कि ऐसे ही एक निजी अस्पताल हरि ओम नर्सिंग होम जो कि रामापुर में स्थित है जहां सुविधाओं के नाम पर मरीजों को देने के लिए कुछ भी नहीं सिवाय परेशानियां और मौत के पूरी तरह से मानक विहीन तर्ज पर चल रहा है हरिओम नर्सिंग होम नवजात बच्चों के लिए मृत्यु लोक है कभी भी किसी भी बड़ी घटना के शिकार हो सकते हैं जच्चा बच्चा

श्री न्यूज़ के द्वारा स्टिंग करने पर वास्तविक स्थिति बड़ी भैयावह नजर आई इस नर्सिंग होम की बिल्डिंग का निर्माण मानक विहीन है जहां प्रवेश और निकास का एक ही द्वारा वाहनों को पार्क करने का भी कोई स्थान नहीं फायर फाइटिंग सिस्टम भी उपलब्ध नहीं है मरीजों और परिजनों के लिए वेटिंग हॉल की कोई व्यवस्था नहीं साफ सफाई की बात कही जाए तो हाल यह है कि सिजेरियन होने के पश्चात महिलाओं को यूं ही खुले में जगह दी जा रही है उसी जगह पर आम लोगों का भी आना जाना लगा रहता है नवजात बच्चों को जब मशीन में रखा जाता है और यह मशीन जिस रूम में उपलब्ध है वहां की हालत यह बयां करती है कि नवजातओं के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है जब संवाददाता ने हरिओम नर्सिंग होम के वार्मर मशीन की स्थिति जांची तो पता चला कि उस कमरे में चप्पल और जूतों का ढेर लगा हुआ है एक पुताई वाला उसी कमरे की पुताई कर रहा था  कुल मिलाकर निजी अस्पताल की स्थिति यह है की इलाज के नाम पर एक मोटी रकम वसूली जाती है पता नहीं किस आधार पर यह अस्पताल संचालित है ऐसे मानक विहीन नर्सिंग होम के संचालित रहने पर ही पूरा का पूरा शक स्वास्थ्य विभाग पर जाता है कि स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत या लापरवाही की वजह से ही यह निजी अस्पताल निडरता के साथ अपने अपने नर्सिंग होम का संचालन कर रहे हैं और कल को घटित होने वाली किसी परेशानी या मौत का जिम्मेदार कौन होगा हरिओम नर्सिंग होम में मरीजो का इलाज बेसमेंट में भी किया जा रहा है।

अस्पतालों के लिए अग्नि सुरक्षा के मानक

न्यूनतम डेढ़-डेढ़ मीटर चौड़े दो दरवाजे होने चाहिए।

ऊपरी मंजिल पर ओवरहेड टैंक हो, जिसमें हमेशा पानी भरा रहे।

प्रत्येक मंजिल पर होज रील का इंतजाम हो।

जगह-जगह अग्निशमन यंत्र लगे हों।

आपातकालीन संकेतक और फायर अलार्म हो।

बेसमेंट में अस्पताल का संचालन न हो।

अग्निशमन विभाग की एनओसी ली हो।

अग्निशमन विभाग, पुलिस और आपातकालीन नंबरों का डिस्प्ले हो।

वर्जन

जब हरिओम हॉस्पिटल के डॉक्टर से बात की गई तो उनका स्पस्ट जवाब था कि उनका अस्पताल मानक विहीन नही है।


ऐसी स्थिति में जिला प्रशासन को देखना होगा और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए ऐसे मानक विहीन निजी अस्पतालों पर जो केवल मरीजो का शोषण करते नजर आ रहे हैं उनपर उचित कार्यवाही कर मरीजो के साथ न्याय करें।




No comments