मेरी कहानी मेरी जुबानी मम्मी को वर्दी में देखकर ले लिया था प्रण, ऐसे डॉक्टरी छोड़ IPS बनी बेटी
मेरी कहानी मेरी जुबानी
मम्मी को वर्दी में देखकर ले लिया था प्रण, ऐसे डॉक्टरी छोड़ IPS बनी बेटी
श्री न्यूज़ 24
आलोक कुमार वर्मा
दिल्ली पुलिस में एएसआई रेखा गुप्ता की बेटी डॉ पूजा ने अपना सपना पूरा करके मां का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. UPSC परीक्षा में 147वीं रैंक पाने वाली पूजा के शब्दों में कहें तो जिस नौकरी में मां सबसे नीचे पद से आई थीं, मैंने ठाना था कि एक दिन इस नौकरी का सबसे बड़ा पद हासिल करूंगी. ये प्रण ही था जो मेरी ताकत बना रहा. फिर एक दंत विशेषज्ञ डॉक्टर बनने के बाद मैंने अलग ढंग से तैयारी करके ये पद पाया।
डॉ पूजा गुप्ता की मां एएसआई रेखा गुप्ता सिविल लाइंस कंट्रोल रूम में हैं. वो पूजा के लिए कहती हैं कि मेरा ये बच्चा ईश्वर का आशीर्वाद है. इसने हमेशा हमारा मान बढ़ाया. वो बताती हैं कि जब से कक्षा छह में आई अपनी ही स्कॉलरशिप से पढ़ रही है. इस पर पढ़ाई के लिए कभी भी प्रेशर बनाने की जरूरत नहीं पड़ी. डॉ पूजा के पिता हेमचंद गुप्ता एक प्राइवेट नौकरी करते हैं।
पूजा की सफलता पर हेमचंद गुप्ता ने कहा कि जब पूजा स्कूल में पढ़ती थी, तभी से वो पढ़ने में बहुत अच्छी रही है. वो दसवीं में इतने अच्छे नंबर से पास हुई तो सभी ने मुझे बधाई दी. मुझे उम्मीद थी कि क्लीयर कर लेगी, लेकिन इतने अच्छे की उम्मीद नहीं थी. वो दिन रात पढ़ाई में जुटी रहती थी, डॉ पूजा गुप्ता की एक बहन भी है जो अभी पढ़ाई कर रही ह।
डॉ पूजा का परिवार इंद्रलोक के पास त्रिनगर में रहता है. डॉ पूजा ने आजतक को बताया कि ये उनका यूपीएससी का पहला अटेंप्ट था. उन्हें पहले अटेंप्ट में ही 147 रैंक मिली है. इस रैंक के आधार पर मुझे आईपीएस पर ज्वाइनिंग मिलेगी. वो इससे पहले दिल्ली के इएसआई से पांच साल का डेंटिस्ट्री कोर्स कर चुकी हैं. उन्होंने डॉक्टरी करने के दौरान भी लगातार यूपीएससी की तैयारी की।
ऐसे की तैयारी
डॉ पूजा ने बताया कि उन्होंने कॉलेज के दिनों से ही तैयारी शुरू कर दी थी. इसके बाद डेंटिस्ट की पढ़ाई और प्रैक्टिस के दौरान भी इसकी तैयारी में जुटी रही. उनकी प्राथमिक शिक्षा एनसी जिंदल पब्लिक स्कूल से हुई थी. इसके बाद छठी से 12वीं तक स्कॉलरशिप से पढ़ाई की.* *इस तरह उन्होंने मेडिकल फील्ड से आईपीएस बनने का सफर तय किया. डॉ पूजा ने यूपीएससी की तैयारी साल 2015 से स्टार्ट कर दी थी. मेडिकल की पढ़ाई के साथ इसकी शुरुआत कर दी थी. फिर वहां की पढ़ाई के साथ यूपीएससी का पढ़ना मुश्किल था।
कुछ इस तरह की तैयारी
डॉ पूजा ने बताया कि यूपीएससी प्रीलिम्स में दो- दो सौ नंबर के दो पेपर होते हैं. पहला प्रश्नपत्र जीएस का होता है जिसमें कट आफ से रिजल्ट तय होता है. दूसरा मैथमेटिक्स का होता है जिसमें हमें क्वालीफाइंग होते हैं इसमें 33 प्रतिशत लाने होते हैं. मैंने पूरी तैयारी ये ध्यान में रखकर की थी कि किसमें कितने नंबर लाने हैं. इसके लिए मैंने सबसे ज्यादा ध्यान जीएस यानी जनरल स्टडी पर दिया।
स्कूल के दिनों से कराएं तैयारी
बच्चों में स्कूल के दिनों से ही आईएएस की नींव पड़ जाती है. जिन बच्चों को आईएएस बनना हो, वो छठी कक्षा से ही एनसीईआरटी की किताबों से गंभीरता से विषयों को पढ़ें. डॉ पूजा का कहना है कि यूपीएससी कुछ अलग से नहीं मांगता. जो आपकी फाउंडेशन है उसी का एडवांस फॉर्म मांगता है. तैयारी में लोगों को आटर्स पर ज्यादा फोकस करना रहता है, इसके अलावा इतिहास-भूगोल और अर्थशास्त्र को भी गंभीरता से पढ़ना होता है. इसके अलावा मैंने अपनी तैयारी में तो कक्षा आठ, नौ और दस की विज्ञान को भी अच्छे से पढ़ा. इसके अलावा निरंतर एक साल से अधिक समय का न्यूजपेपर बारीकी से पढ़ा।
मां बहुत खुश है मेरी: डॉ पूजा
डॉ पूजा ने कहा कि मेरी मम्मी मेरे 147 रैंक लाने से बहुत ज्यादा खुश हैं. वो कहती हैं कि मैंने बचपन से मम्मी को वर्दी में देखा और महसूस किया कि लोग उनका वर्दी के कारण सम्मान करते हैं. इसके अलावा मुझे दिल्ली* *पुलिस से काफी पुरस्कार मिले हैं, उनके काम को देखकर बहुत प्रभावित होती थी. खासकर महिला अफसरों ने मुझे बहुत प्रभावित किया. अब मैं इस पद पर जाकर महिलाओं के लिए काम करना चाहती हूं।
विशेष आग्रह
अपने आस पास बहुत से ऐसे लोगों को देखा होगा, बहुत से ऐसे लोगों के बारें में सुना या पढ़ा होगा जो निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करते हैं, गरीबों की सेवा करते हैं, धर्म की दीवार को तोड़कर सभी धर्मों की एकता की बात करते हैं, गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं, अनाथ बच्चों की पढ़ाई या खाने पीने का खर्च उठाते हैं, जानवरों की सुरक्षा या देखभाल करते हैं, बहुत ही गरीबी या मुश्किल स्थिति से गुजरते हुए भी हार नहीं मान रहे हैं, कोई सुविधा न होने के बावजूद भी पढना नहीं छोड़ रहें हैं, सामाजिक सन्देश देने के लिए कोई नया काम कर रहे हैं, आदि आदि। इस पहल में उन सभी लोगों की जिंदगी से जुडी और प्रेरणादायक कहानी प्रस्तुत की जाएगी जो समाज के लिए एक प्रेरणा हैं या एक मिसाल हैं।
और इस शुरुआत का मकसद सिर्फ लोगों को दूसरों की मदद करने के लिये, मुश्किलों और निराशाओं से बाहर निकलने के लिए, अपनी और दूसरों की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करना हैं। और मुझे विश्वास हैं कि मेरा ये प्रयास अपने मकसद में जरुर सफल होगा।
अगर आपके आसपास भी ऐसा कोई शख्स है, ऐसा कोई उदाहरण है, जो किसी भी तरह से अपनी और दूसरों की जिंदगी में बदलाव ला रहा है और दूसरों के लिए एक प्रेरणा है और आप उस शख्स की प्रेरणादायक कहानी लोगो को बताना चाहते हैं तो अपनी एक फोटो और अपने बारे में थोड़ी जानकारी जैसे- आपका नाम, जगह, क्या करते हैं? आदि के साथ उस शख्स की कहानी और सम्बंधित Image हमें भेज सकते हैं। पसंद आने पर उस शख्स की कहानी आपके नाम और फोटो के साथ पोस्ट की जाएगी।
"आप की कहानी, आप की ज़ुबानी। अपनी आपबीती हमें बताएँ, हम दुनिया को बताएँगे"
मम्मी को वर्दी में देखकर ले लिया था प्रण, ऐसे डॉक्टरी छोड़ IPS बनी बेटी
श्री न्यूज़ 24
आलोक कुमार वर्मा
दिल्ली पुलिस में एएसआई रेखा गुप्ता की बेटी डॉ पूजा ने अपना सपना पूरा करके मां का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. UPSC परीक्षा में 147वीं रैंक पाने वाली पूजा के शब्दों में कहें तो जिस नौकरी में मां सबसे नीचे पद से आई थीं, मैंने ठाना था कि एक दिन इस नौकरी का सबसे बड़ा पद हासिल करूंगी. ये प्रण ही था जो मेरी ताकत बना रहा. फिर एक दंत विशेषज्ञ डॉक्टर बनने के बाद मैंने अलग ढंग से तैयारी करके ये पद पाया।
डॉ पूजा गुप्ता की मां एएसआई रेखा गुप्ता सिविल लाइंस कंट्रोल रूम में हैं. वो पूजा के लिए कहती हैं कि मेरा ये बच्चा ईश्वर का आशीर्वाद है. इसने हमेशा हमारा मान बढ़ाया. वो बताती हैं कि जब से कक्षा छह में आई अपनी ही स्कॉलरशिप से पढ़ रही है. इस पर पढ़ाई के लिए कभी भी प्रेशर बनाने की जरूरत नहीं पड़ी. डॉ पूजा के पिता हेमचंद गुप्ता एक प्राइवेट नौकरी करते हैं।
पूजा की सफलता पर हेमचंद गुप्ता ने कहा कि जब पूजा स्कूल में पढ़ती थी, तभी से वो पढ़ने में बहुत अच्छी रही है. वो दसवीं में इतने अच्छे नंबर से पास हुई तो सभी ने मुझे बधाई दी. मुझे उम्मीद थी कि क्लीयर कर लेगी, लेकिन इतने अच्छे की उम्मीद नहीं थी. वो दिन रात पढ़ाई में जुटी रहती थी, डॉ पूजा गुप्ता की एक बहन भी है जो अभी पढ़ाई कर रही ह।
डॉ पूजा का परिवार इंद्रलोक के पास त्रिनगर में रहता है. डॉ पूजा ने आजतक को बताया कि ये उनका यूपीएससी का पहला अटेंप्ट था. उन्हें पहले अटेंप्ट में ही 147 रैंक मिली है. इस रैंक के आधार पर मुझे आईपीएस पर ज्वाइनिंग मिलेगी. वो इससे पहले दिल्ली के इएसआई से पांच साल का डेंटिस्ट्री कोर्स कर चुकी हैं. उन्होंने डॉक्टरी करने के दौरान भी लगातार यूपीएससी की तैयारी की।
ऐसे की तैयारी
डॉ पूजा ने बताया कि उन्होंने कॉलेज के दिनों से ही तैयारी शुरू कर दी थी. इसके बाद डेंटिस्ट की पढ़ाई और प्रैक्टिस के दौरान भी इसकी तैयारी में जुटी रही. उनकी प्राथमिक शिक्षा एनसी जिंदल पब्लिक स्कूल से हुई थी. इसके बाद छठी से 12वीं तक स्कॉलरशिप से पढ़ाई की.* *इस तरह उन्होंने मेडिकल फील्ड से आईपीएस बनने का सफर तय किया. डॉ पूजा ने यूपीएससी की तैयारी साल 2015 से स्टार्ट कर दी थी. मेडिकल की पढ़ाई के साथ इसकी शुरुआत कर दी थी. फिर वहां की पढ़ाई के साथ यूपीएससी का पढ़ना मुश्किल था।
कुछ इस तरह की तैयारी
डॉ पूजा ने बताया कि यूपीएससी प्रीलिम्स में दो- दो सौ नंबर के दो पेपर होते हैं. पहला प्रश्नपत्र जीएस का होता है जिसमें कट आफ से रिजल्ट तय होता है. दूसरा मैथमेटिक्स का होता है जिसमें हमें क्वालीफाइंग होते हैं इसमें 33 प्रतिशत लाने होते हैं. मैंने पूरी तैयारी ये ध्यान में रखकर की थी कि किसमें कितने नंबर लाने हैं. इसके लिए मैंने सबसे ज्यादा ध्यान जीएस यानी जनरल स्टडी पर दिया।
स्कूल के दिनों से कराएं तैयारी
बच्चों में स्कूल के दिनों से ही आईएएस की नींव पड़ जाती है. जिन बच्चों को आईएएस बनना हो, वो छठी कक्षा से ही एनसीईआरटी की किताबों से गंभीरता से विषयों को पढ़ें. डॉ पूजा का कहना है कि यूपीएससी कुछ अलग से नहीं मांगता. जो आपकी फाउंडेशन है उसी का एडवांस फॉर्म मांगता है. तैयारी में लोगों को आटर्स पर ज्यादा फोकस करना रहता है, इसके अलावा इतिहास-भूगोल और अर्थशास्त्र को भी गंभीरता से पढ़ना होता है. इसके अलावा मैंने अपनी तैयारी में तो कक्षा आठ, नौ और दस की विज्ञान को भी अच्छे से पढ़ा. इसके अलावा निरंतर एक साल से अधिक समय का न्यूजपेपर बारीकी से पढ़ा।
मां बहुत खुश है मेरी: डॉ पूजा
डॉ पूजा ने कहा कि मेरी मम्मी मेरे 147 रैंक लाने से बहुत ज्यादा खुश हैं. वो कहती हैं कि मैंने बचपन से मम्मी को वर्दी में देखा और महसूस किया कि लोग उनका वर्दी के कारण सम्मान करते हैं. इसके अलावा मुझे दिल्ली* *पुलिस से काफी पुरस्कार मिले हैं, उनके काम को देखकर बहुत प्रभावित होती थी. खासकर महिला अफसरों ने मुझे बहुत प्रभावित किया. अब मैं इस पद पर जाकर महिलाओं के लिए काम करना चाहती हूं।
विशेष आग्रह
अपने आस पास बहुत से ऐसे लोगों को देखा होगा, बहुत से ऐसे लोगों के बारें में सुना या पढ़ा होगा जो निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करते हैं, गरीबों की सेवा करते हैं, धर्म की दीवार को तोड़कर सभी धर्मों की एकता की बात करते हैं, गरीब बच्चों को पढ़ाते हैं, अनाथ बच्चों की पढ़ाई या खाने पीने का खर्च उठाते हैं, जानवरों की सुरक्षा या देखभाल करते हैं, बहुत ही गरीबी या मुश्किल स्थिति से गुजरते हुए भी हार नहीं मान रहे हैं, कोई सुविधा न होने के बावजूद भी पढना नहीं छोड़ रहें हैं, सामाजिक सन्देश देने के लिए कोई नया काम कर रहे हैं, आदि आदि। इस पहल में उन सभी लोगों की जिंदगी से जुडी और प्रेरणादायक कहानी प्रस्तुत की जाएगी जो समाज के लिए एक प्रेरणा हैं या एक मिसाल हैं।
और इस शुरुआत का मकसद सिर्फ लोगों को दूसरों की मदद करने के लिये, मुश्किलों और निराशाओं से बाहर निकलने के लिए, अपनी और दूसरों की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए प्रेरित करना हैं। और मुझे विश्वास हैं कि मेरा ये प्रयास अपने मकसद में जरुर सफल होगा।
अगर आपके आसपास भी ऐसा कोई शख्स है, ऐसा कोई उदाहरण है, जो किसी भी तरह से अपनी और दूसरों की जिंदगी में बदलाव ला रहा है और दूसरों के लिए एक प्रेरणा है और आप उस शख्स की प्रेरणादायक कहानी लोगो को बताना चाहते हैं तो अपनी एक फोटो और अपने बारे में थोड़ी जानकारी जैसे- आपका नाम, जगह, क्या करते हैं? आदि के साथ उस शख्स की कहानी और सम्बंधित Image हमें भेज सकते हैं। पसंद आने पर उस शख्स की कहानी आपके नाम और फोटो के साथ पोस्ट की जाएगी।
"आप की कहानी, आप की ज़ुबानी। अपनी आपबीती हमें बताएँ, हम दुनिया को बताएँगे"

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