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गोलागोकरणनाथ।किसानों की बदहाली का जिम्मेवार कौन?

किसानों की बदहाली का जिम्मेवार कौन?

कैसे मनाये किसान त्योहार

कहाँ से लाये बच्चो की फीस कहाँ से लगाये खेती में लागत

कब तक ले किसान महाजनु कर्ज

कौन सुनेगा किसानों का दर्द

क्या किसानों के लिए आएगा कोई मसीहा

क्या किसानों के हिस्से में है सिर्फ बादे

श्री न्यूज़ 24
आलोक कुमार वर्मा

गोलागोकरणनाथ खीरी

मामला है गोला चीनी मिल का जहाँ मिल प्रसासन किसानों के गन्ने के मूल्य पर कुंडली मार कर बैठे है भुगतान न होने से किसान भुखमरी की कगार पर आ गया है।  गोला चीनी मिल ने अभी तक मात्र 15 जनवरी तक का भुगतान किया है किया गया भुगतान किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। रक्षाबंधन आदि त्यौहार सर पर हैं बच्चों की पढ़ाई फीस धान की खेती  आदि की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए आज अन्नदाता दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं वही मिल प्रशासन शासन किसी की भी नजर किसानों की दयनीय स्थिति पर नहीं जा रही है। भुगतान न होने से आहत होकर अभी कुछ किसानों ने इच्छा मृत्यु की मांग की है अब ऐसे में सवाल ये उठता है क्या अन्नदाता को अपना ही पैसा वापिस पाने के लिए इच्छा मृत्यु की की मांग करनी पड़ेगी हक की लड़ाई लड़नी पड़ेगी आखिर यह संघर्ष किसान कब तक करेंगे  चीनी मिल ने अभी तक खरीदे गए गन्ने का मात्र 44 फ़ीसदी भुगतान किया है  चीनी मिल के द्वारा किसानों को 3 अरब 63 करोड़ 57 लाख 51 हजार 7 सौ 81  रुपए भुगतान करना शेष है जहां सरकार ने 14 दिन के अंदर भुगतान दिलाने का वादा किया था वह वादा भी फेल होता नजर आ रहा है विगत कुछ दिनों पहले किसानों के द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया था जिसमें किसानों को जल्द से जल्द भुगतान कराए जाने का आश्वासन दिया गया था वह भी आश्वासन फेल होता नजर आता है अब सवाल यह उठता है कि क्या चीनी मिल ने अपने यहां कार्यरत किसी भी कर्मचारी का वेतन रोका यदि नहीं रोका तो क्यों नहीं रोका क्या पैसों की समस्या सिर्फ अन्नदाता के लिए ही है या फिर मिल कर्मचारियों के लिए भी आज किसान गन्ने की खेती से मोहभंग कर रहा है उसका एक सटीक कारण समय से गन्ने का भुगतान ना हो पाना आज जिले में गन्ने की सर्वाधिक खेती की जाती थी जिसका रकबा साल दर साल कम होता जा रहा है किसान बताते हैं गन्ने की खेती में प्रति कुंटल 200 पचासी रुपए की लागत आती है और मूल्य ₹325 मिलता है जोकि मेहनत के हिसाब से नाकाफी है हर क्षेत्र में हर सरकार में हर बार सिर्फ किसान ही ठगा जाता है ऐसा क्यों?


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