मिशन कश्मीर' पर अमित शाह, गृहमंत्री बनते ही उठाया ये कदम,विरोधियों की हिल जायेगी नींव
मिशन कश्मीर' पर अमित शाह, गृहमंत्री बनते ही उठाया ये कदम,विरोधियों की हिल जायेगी नींव
श्री न्यूज़ 24
मुकेश वर्मा
नई दिल्ली
मोदी सरकार ने पहली कैबिनेट मीटिंग में देश के सभी किसानों को 6हजार रुपये सालाना और शहीदों के बच्चों की छात्रवृत्ति बढ़ाने का वादा पूरा किया वहीं अब कश्मीर पर किये वादों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। कुछ लोगों का कहना है कि गृहमंत्रालय का कार्यभार संभालते ही अमित शाह ने मिशन कश्मीर पर काम शुरू कर दिया है। इस दिशा में पहला कदम जम्मू-कश्मीर विधानसभा सीटों में व्याप्त विसंगति को दूर करना है। जिसके लिए संघीय सरकार जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को विशेषाधिकार देने जा रही है। इसके लिए सरकार आर्टिकल 47 में संशोधन कर राज्यपाल को शक्तियां प्रदान कर जम्मू-कश्मीर की विधानसभा सीटों का परिसीमन कर सकती है। जम्मू कश्मीर में आखिरी बार परिसीमन 1995 में किया गया था।
राज्य के संविधान के मुताबिक हर 10 साल के बाद निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाना चाहिए। इस तरह से जम्मू-कश्मीर में सीटों का परिसीमन 2005 में किया जाना था, लेकिन फारुक अब्दुल्ला सरकार ने 2002 में इस पर 2026 तक के लिए रोक लगा दी थी। अब्दुल्ला सरकार ने जम्मू-कश्मीर जनप्रतिनिधित्व कानून, 1957 और जम्मू-कश्मीर के संविधान में बदलाव करते हुए यह फैसला लिया था।वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक सूबे के जम्मू संभाग की आबादी 53,78,538 है और यह प्रांत की 42.89 फीसदी आबादी है। विधानसभा की कुल 37 सीटें यहां से चुनी जाती है। दूसरी तरफ कश्मीर घाटी की आबादी 68,88,475 है और यह प्रांत की 54.93 फीसदी हिस्सा है। यहां से कुल 46 विधायक चुने जाते हैं। इसके अलावा लद्दाख में 4 सीटें हैं और यहां से विधानसभा के लिए 4 विधायक चुने जाते हैं।
केंद्र सरकार यहां इसलिए परिसीमन पर जोर दे रही है ताकि एससी और एसटी समुदाय के लिए सीटों के आरक्षण की नई व्यवस्था लागू की जा सके। घाटी की किसी भी सीट पर आरक्षण नहीं है, लेकिन यहां 11 फीसदी गुर्जर बकरवाल और गद्दी जनजाति समुदाय के लोगों की आबादी है। जम्मू संभाग में 7 सीटें एससी के लिए रिजर्व हैं, इनका भी रोटेशन नहीं हुआ है। ऐसे में नए सिरे से परिसीमन से सामाजिक समीकरणों पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है।
श्री न्यूज़ 24
मुकेश वर्मा
नई दिल्ली
मोदी सरकार ने पहली कैबिनेट मीटिंग में देश के सभी किसानों को 6हजार रुपये सालाना और शहीदों के बच्चों की छात्रवृत्ति बढ़ाने का वादा पूरा किया वहीं अब कश्मीर पर किये वादों को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। कुछ लोगों का कहना है कि गृहमंत्रालय का कार्यभार संभालते ही अमित शाह ने मिशन कश्मीर पर काम शुरू कर दिया है। इस दिशा में पहला कदम जम्मू-कश्मीर विधानसभा सीटों में व्याप्त विसंगति को दूर करना है। जिसके लिए संघीय सरकार जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को विशेषाधिकार देने जा रही है। इसके लिए सरकार आर्टिकल 47 में संशोधन कर राज्यपाल को शक्तियां प्रदान कर जम्मू-कश्मीर की विधानसभा सीटों का परिसीमन कर सकती है। जम्मू कश्मीर में आखिरी बार परिसीमन 1995 में किया गया था।
राज्य के संविधान के मुताबिक हर 10 साल के बाद निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाना चाहिए। इस तरह से जम्मू-कश्मीर में सीटों का परिसीमन 2005 में किया जाना था, लेकिन फारुक अब्दुल्ला सरकार ने 2002 में इस पर 2026 तक के लिए रोक लगा दी थी। अब्दुल्ला सरकार ने जम्मू-कश्मीर जनप्रतिनिधित्व कानून, 1957 और जम्मू-कश्मीर के संविधान में बदलाव करते हुए यह फैसला लिया था।वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक सूबे के जम्मू संभाग की आबादी 53,78,538 है और यह प्रांत की 42.89 फीसदी आबादी है। विधानसभा की कुल 37 सीटें यहां से चुनी जाती है। दूसरी तरफ कश्मीर घाटी की आबादी 68,88,475 है और यह प्रांत की 54.93 फीसदी हिस्सा है। यहां से कुल 46 विधायक चुने जाते हैं। इसके अलावा लद्दाख में 4 सीटें हैं और यहां से विधानसभा के लिए 4 विधायक चुने जाते हैं।
केंद्र सरकार यहां इसलिए परिसीमन पर जोर दे रही है ताकि एससी और एसटी समुदाय के लिए सीटों के आरक्षण की नई व्यवस्था लागू की जा सके। घाटी की किसी भी सीट पर आरक्षण नहीं है, लेकिन यहां 11 फीसदी गुर्जर बकरवाल और गद्दी जनजाति समुदाय के लोगों की आबादी है। जम्मू संभाग में 7 सीटें एससी के लिए रिजर्व हैं, इनका भी रोटेशन नहीं हुआ है। ऐसे में नए सिरे से परिसीमन से सामाजिक समीकरणों पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है।

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