खेती वाली जमीन को धड़ल्ले से बेंच रहे प्लाट बनाकर, करोड़ों के राजस्व को लगा रहे चूना
खेती वाली जमीन को धड़ल्ले से बेंच रहे प्लाट बनाकर,
करोड़ों के राजस्व को लगा रहे चूना
श्री न्यूज़ 24
डी पी मिश्र
लखीमपुर-खीरी
अभी गत दिवस प्रापर्टी डीलरों पर प्रशासन ने शिकंजा कसते हुए नगर में जमीनी स्तर पर कार्यवाही की जिससे प्रापर्टी डीलरों में हड़कम्प मचा हुआ है और इस प्रशासनिक कार्यवाही की काफी चर्चा हो रही है। नगरों में काफी अर्से से सक्रिय सफेदपोश प्रापर्टी डीलर के कारोबारी खेती वाली जमीन को प्लाट में बदलकर सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान कर रातों रात लखपति करोड़पति बन रहे हैं। इस घालमेल की जांच कराई जाये तो करोडों रुपये का जमीन घोटाला सामने आ सकता है। और सफेदपोशों के चेहरे भी बेनकाब हो जायेगें। विगत कुछेक सालों पूर्व नगरों में गिने चुने लोग ही प्रॉपर्टी खरीदने बेचने यह का कारोबार कर रहे थे। लेकिन बिना लागत लगाए मुनाफा कमाने की ललक को दिल मे संजोकर अब तमाम लोग प्रापर्टी डीलिंग का कारोबार करने लगे हंै। इसमे लखनऊ आदि नगरों के बड़े कारोबारी समेत कई नेता भी शामिल हो गए बताये जाते हैं। यह लोग पर्दे के पीछे से धन लाभ का कारोबार कर रहे हैं। और सरकारी खजाने को लाखों रुपये के राजस्व की हानि पहुँचा रहे हंै। जानकर सूत्रों ने किसी भी हालात में अपना नाम न खोलने की शर्त पर बताया कि प्रापर्टी डीलिंग के कारोबार करने वाले लोग खेती वाली जमीन का उपभोग परिवर्तन कराये बिना उसकी प्लाटिंग करके ऊँचे दामों पर बेचकर सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि नियमानुसार खेती वाली जमीन का उपभोग बदलना चाहिए उसके बाद ही उसकी प्लॉटिंग की जा सकती है। जबकि यहां सक्रिय भूमाफिया प्रापर्टी डीलर कानून को कोने करके खेती वाली जमीन को एकड़ में खरीदकर कम रेट का स्टाम्पशुल्क अदा करते हैं और बाद में इसी जमीन को प्लाट काटकर महंगे रेट में बेचते हैं। सूत्रों ने बताया कि नियमानुसार पहले जमीन का उपभोग बदलना चाहिए। उपभोग परिवर्तन के बाद ही खेती वाली जमीन की प्लाटिंग हो सकती है। जबकि यहां पर सब उल्टा चल रहा है। नियम बिपरीत खेती वाली जमींन को प्लाटिंग करके खुलेआम बेच कर प्रापर्टी डीलर लाखों रुपये कम रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस अवैध कारोबार में लखनऊ के बड़े कारोबारी तथा कई सफेदपोश नेता भी शामिल है। जो खेती वाली जमीनों को कौड़ियों के भाव पर खरीद कर उसकी प्लाटिंग करके लाखों रुपये रातों रात कमा रहे हैं और सरकार को खुले आम राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि यह स्थिति केवल लखीमपुर जिले के ही नगरों में ही नहीं बल्कि कमोवेश विकसित हो रहे प्रदेश के हर नगरीय क्षेत्र में होती जा रही है कहीं कम तो कहीं अधिक। नागरिकों का मानना है कि इस घालमेल की जांच कराई जाए तो प्रत्येक नगरीय क्षेत्र में करोड़ों रुपये के स्टाम्प चोरी का खुलासा होगा ही साथ में सफेदपोश नेताओं के चेहरे भी बेनकाब हो जायेंगे जो कथित पहुंच के बल पर यह गोरखधंधा चला रहे हैं। इन तथा कथित प्रापर्टी डीलरों ने विगत करीब तीन दसकों में पता नहीं कितने ही गरीब किसानों की जमीने हड़प कर उन्हे प्लाटिंग कर बेंच डाला। ऐसे में किसान यदि दबंग हुआ या किसी दबंग की उसे सरपरस्ती उसे हासिल हो गई तो इन बेइमान प्रापर्टी डीलरों से कुछ पैसे अपनी जमीन के ले पाया अन्यथा की स्थिति में दौड़ लगाकर थक हार अपने को भाग्य भगवान के भरोसे छोड़कर चुपचाप बैठ गया। अगर किसी ने इस सम्बन्ध में न्यायालय की शरण लेने की हिम्मत दिखाई तो वह वहां की दौड़ लगाते लगाते तारीखें लेते लेते घिस गया। अदालत में गवाह सुबूत का जो चक्र प्रक्रिया प्रारम्भ होती है उससे तो जन सामान्य वाकिफ ही है। पैसे वाले ये कथित प्रापर्टी डीलर पैसे के बलबूते पर अधिकांशतः सुबूत गायब या नष्ट करवा देते हैं जिस कारण वहां भी कोई राहत पीड़ित को नहीं मिल पाती। जमीनों की इस खरीद फरोख्त में अधिकांश प्रापर्टी डीलरों ने ऐसा घाल मेल रचाया कि जिसकी जमीन खरीदी उसकी तो खरीदी ही पड़ोस वाले की भी जमीन को भी अपनी बताकर कब्जाकर बेंच दिया। जिसके चलते तमाम लोग अपनी जमीन या उसका पैसा पाने की ललक लिए दबंगों से अदालतों तक दौड़ते रहे परन्तु उन पर धन बल इतना भारी पड़ा कि उन्हें न तो जमीन ही मिल सकी और न ही पैसा। बल्कि जो कुछ तीर पल्ले था वह इस चक्कर में और खर्च हो गया। और वह पाने की आस लिए कुछ लोग दौड़ते दौड़ते परलोक तक सिधार गए। इन मामलों में प्रापर्टी डीलरों की धांधली का अंदाजा महज इस बात से ही लगाया ला सकता है कि इससे सम्बन्धित तमाम से विवाद इस जनपद के न्यायालयों में ही दसकों से लम्बित चल रहे हैं।
करोड़ों के राजस्व को लगा रहे चूना
श्री न्यूज़ 24
डी पी मिश्र
लखीमपुर-खीरी
अभी गत दिवस प्रापर्टी डीलरों पर प्रशासन ने शिकंजा कसते हुए नगर में जमीनी स्तर पर कार्यवाही की जिससे प्रापर्टी डीलरों में हड़कम्प मचा हुआ है और इस प्रशासनिक कार्यवाही की काफी चर्चा हो रही है। नगरों में काफी अर्से से सक्रिय सफेदपोश प्रापर्टी डीलर के कारोबारी खेती वाली जमीन को प्लाट में बदलकर सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान कर रातों रात लखपति करोड़पति बन रहे हैं। इस घालमेल की जांच कराई जाये तो करोडों रुपये का जमीन घोटाला सामने आ सकता है। और सफेदपोशों के चेहरे भी बेनकाब हो जायेगें। विगत कुछेक सालों पूर्व नगरों में गिने चुने लोग ही प्रॉपर्टी खरीदने बेचने यह का कारोबार कर रहे थे। लेकिन बिना लागत लगाए मुनाफा कमाने की ललक को दिल मे संजोकर अब तमाम लोग प्रापर्टी डीलिंग का कारोबार करने लगे हंै। इसमे लखनऊ आदि नगरों के बड़े कारोबारी समेत कई नेता भी शामिल हो गए बताये जाते हैं। यह लोग पर्दे के पीछे से धन लाभ का कारोबार कर रहे हैं। और सरकारी खजाने को लाखों रुपये के राजस्व की हानि पहुँचा रहे हंै। जानकर सूत्रों ने किसी भी हालात में अपना नाम न खोलने की शर्त पर बताया कि प्रापर्टी डीलिंग के कारोबार करने वाले लोग खेती वाली जमीन का उपभोग परिवर्तन कराये बिना उसकी प्लाटिंग करके ऊँचे दामों पर बेचकर सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि नियमानुसार खेती वाली जमीन का उपभोग बदलना चाहिए उसके बाद ही उसकी प्लॉटिंग की जा सकती है। जबकि यहां सक्रिय भूमाफिया प्रापर्टी डीलर कानून को कोने करके खेती वाली जमीन को एकड़ में खरीदकर कम रेट का स्टाम्पशुल्क अदा करते हैं और बाद में इसी जमीन को प्लाट काटकर महंगे रेट में बेचते हैं। सूत्रों ने बताया कि नियमानुसार पहले जमीन का उपभोग बदलना चाहिए। उपभोग परिवर्तन के बाद ही खेती वाली जमीन की प्लाटिंग हो सकती है। जबकि यहां पर सब उल्टा चल रहा है। नियम बिपरीत खेती वाली जमींन को प्लाटिंग करके खुलेआम बेच कर प्रापर्टी डीलर लाखों रुपये कम रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस अवैध कारोबार में लखनऊ के बड़े कारोबारी तथा कई सफेदपोश नेता भी शामिल है। जो खेती वाली जमीनों को कौड़ियों के भाव पर खरीद कर उसकी प्लाटिंग करके लाखों रुपये रातों रात कमा रहे हैं और सरकार को खुले आम राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि यह स्थिति केवल लखीमपुर जिले के ही नगरों में ही नहीं बल्कि कमोवेश विकसित हो रहे प्रदेश के हर नगरीय क्षेत्र में होती जा रही है कहीं कम तो कहीं अधिक। नागरिकों का मानना है कि इस घालमेल की जांच कराई जाए तो प्रत्येक नगरीय क्षेत्र में करोड़ों रुपये के स्टाम्प चोरी का खुलासा होगा ही साथ में सफेदपोश नेताओं के चेहरे भी बेनकाब हो जायेंगे जो कथित पहुंच के बल पर यह गोरखधंधा चला रहे हैं। इन तथा कथित प्रापर्टी डीलरों ने विगत करीब तीन दसकों में पता नहीं कितने ही गरीब किसानों की जमीने हड़प कर उन्हे प्लाटिंग कर बेंच डाला। ऐसे में किसान यदि दबंग हुआ या किसी दबंग की उसे सरपरस्ती उसे हासिल हो गई तो इन बेइमान प्रापर्टी डीलरों से कुछ पैसे अपनी जमीन के ले पाया अन्यथा की स्थिति में दौड़ लगाकर थक हार अपने को भाग्य भगवान के भरोसे छोड़कर चुपचाप बैठ गया। अगर किसी ने इस सम्बन्ध में न्यायालय की शरण लेने की हिम्मत दिखाई तो वह वहां की दौड़ लगाते लगाते तारीखें लेते लेते घिस गया। अदालत में गवाह सुबूत का जो चक्र प्रक्रिया प्रारम्भ होती है उससे तो जन सामान्य वाकिफ ही है। पैसे वाले ये कथित प्रापर्टी डीलर पैसे के बलबूते पर अधिकांशतः सुबूत गायब या नष्ट करवा देते हैं जिस कारण वहां भी कोई राहत पीड़ित को नहीं मिल पाती। जमीनों की इस खरीद फरोख्त में अधिकांश प्रापर्टी डीलरों ने ऐसा घाल मेल रचाया कि जिसकी जमीन खरीदी उसकी तो खरीदी ही पड़ोस वाले की भी जमीन को भी अपनी बताकर कब्जाकर बेंच दिया। जिसके चलते तमाम लोग अपनी जमीन या उसका पैसा पाने की ललक लिए दबंगों से अदालतों तक दौड़ते रहे परन्तु उन पर धन बल इतना भारी पड़ा कि उन्हें न तो जमीन ही मिल सकी और न ही पैसा। बल्कि जो कुछ तीर पल्ले था वह इस चक्कर में और खर्च हो गया। और वह पाने की आस लिए कुछ लोग दौड़ते दौड़ते परलोक तक सिधार गए। इन मामलों में प्रापर्टी डीलरों की धांधली का अंदाजा महज इस बात से ही लगाया ला सकता है कि इससे सम्बन्धित तमाम से विवाद इस जनपद के न्यायालयों में ही दसकों से लम्बित चल रहे हैं।

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