गठबंधन प्रत्याशी के लिये आसान नही होगी जीत दर्ज करना
गठबंधन प्रत्याशी के लिये आसान नही होगी जीत दर्ज करना
श्री न्यूज़ 24
विमलेश कुमार चौधरी
मोहम्मदी(खीरी)
मुबंई से नोटो के दमपर चुनाव जीतने आये गठबंधन प्रत्याशी अरशद सिददीकी के लिये क्या धौरहरा लोकसभा से जीत दर्ज करने की राह आसान होगी क्या गठबंधन इस सीट पर जीत दर्ज कर पायेगी।यह तो आने बाला समय ही बतायेगा क्योंकि इस सीट पर सन 2009 मे काग्रेंस को जीत मिली थी उस समय चुनाव मैदान मे प्रत्याशी जितिन प्रसाद थे और फिर सन 2014 मे मोदी लहर चली और इस सीट पर भाजपा का कब्जा हो गया और रेखा वर्मा ने जीत हासिल की थी।लेकिन पांच सालो तक कोई खास विकास नही कर सकी और सिर्फ कागजों पर ही विकास हुआ और जनता जान गई यह सांसद क्या काम कर सकती है जनता के लिये।इन्ही बातो को देखकर काग्रेंस ने एक बार फिर जितिन प्रसाद को मैदान मे उतार दिया हालांकि पहले पार्टी मे हाई वोल्टेज ड्रामा चला पार्टी हाईकमान ने जितिन प्रसाद को लखनऊ से चुनाव लड़ने का फरमान सुनाया लेकिन उसके बाद जनता ने जितिन के लिये काफी जतन किया और यह मेहनत रंग लाई और पार्टी हाईकमान ने फिर धौरहरा से चुनाव लड़ने का आदेश दे दिया।जिसके बाद गठबंधन और भाजपा के प्रत्याशियों के दिल की धड़कनें तेज हो गई और उधर जनता ने ठान लिया है जितिन प्रसाद को जिताने की ठान लिया है जिसके चलते विपक्षियों को नीद नही आ रही है।मुबंई से नोटो के दम पर चुनाव जीतने आये है जिनको ना जनता जानती है और ना वह जनता को क्योंकि वह कभी जनता के बीच आये ही नही है।फिलहाल इस धौरहरा लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय चुनाव मुकाबला होने के आसार है क्योंकि गठबंधन प्रत्याशी से सपा के कार्यकताओं को भी नही राष आ रहा है प्रत्याशी सपा तो सपा बसपा के कार्यकर्ताओ को नही भी नही राष आ रहा है और वह संतुष्ट नही है।अरशद सिददीकी के पिता इलियास आजमी भी यहा से चुनाव लड़े थे और जीते भी थे और उन्होंने भी जनता के लिये कुछ खास नही कर सके थे जब एक पिता जनता के लिये कुछ नही कर सके तो बेटा जनता के लिये क्या करेगे यह बात सोचने की जरूरत है और वह सोच समझकर प्रत्याशी को वोट दे जो विकास कर सके और जनता का साथ दे और जनता के सुख दुख मे जनता के साथ खड़ा हो ऐसे प्रत्याशी को वोट देना चाहिए।
लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और नेता गली गलियारों की खाक छानने लगे है।धौरहरा लोकसभा मे चुनाव बहुत अजीब स्थिति मे है जहाँ पर गठबंधन ने बाहरी प्रत्याशी को मैदान मे उतारा तो वही भाजपा ने अपने पुराने प्रत्याशी को एक बार पुनः उम्मीदवार बनाकर मैदान मे उतार दिया है।तो काग्रेंस कैसे मौका गवा देती जितिन प्रसाद को पहले लखनऊ से चुनाव लड़ने की खबरे आ रही थी फिर भाजपा मे जाने की चर्चाओं से बाजार गर्म हुआ था। फिर बाद मे जितिन प्रसाद भी धौरहरा से चुनाव मैदान मे उतर पड़े हालांकि की गठबंधन ने मुस्लिम चेहरा मैदान मे उतारा जरुर है लेकिन जनता को यह प्रत्याशी राश नही आ रहा है।यह कहना गलत ना होगा की धौरहरा लोकसभा क्षेत्र की एक बार फिर जितिन प्रसाद के हाथो मे कमान जा सकती है।
श्री न्यूज़ 24
विमलेश कुमार चौधरी
मोहम्मदी(खीरी)
मुबंई से नोटो के दमपर चुनाव जीतने आये गठबंधन प्रत्याशी अरशद सिददीकी के लिये क्या धौरहरा लोकसभा से जीत दर्ज करने की राह आसान होगी क्या गठबंधन इस सीट पर जीत दर्ज कर पायेगी।यह तो आने बाला समय ही बतायेगा क्योंकि इस सीट पर सन 2009 मे काग्रेंस को जीत मिली थी उस समय चुनाव मैदान मे प्रत्याशी जितिन प्रसाद थे और फिर सन 2014 मे मोदी लहर चली और इस सीट पर भाजपा का कब्जा हो गया और रेखा वर्मा ने जीत हासिल की थी।लेकिन पांच सालो तक कोई खास विकास नही कर सकी और सिर्फ कागजों पर ही विकास हुआ और जनता जान गई यह सांसद क्या काम कर सकती है जनता के लिये।इन्ही बातो को देखकर काग्रेंस ने एक बार फिर जितिन प्रसाद को मैदान मे उतार दिया हालांकि पहले पार्टी मे हाई वोल्टेज ड्रामा चला पार्टी हाईकमान ने जितिन प्रसाद को लखनऊ से चुनाव लड़ने का फरमान सुनाया लेकिन उसके बाद जनता ने जितिन के लिये काफी जतन किया और यह मेहनत रंग लाई और पार्टी हाईकमान ने फिर धौरहरा से चुनाव लड़ने का आदेश दे दिया।जिसके बाद गठबंधन और भाजपा के प्रत्याशियों के दिल की धड़कनें तेज हो गई और उधर जनता ने ठान लिया है जितिन प्रसाद को जिताने की ठान लिया है जिसके चलते विपक्षियों को नीद नही आ रही है।मुबंई से नोटो के दम पर चुनाव जीतने आये है जिनको ना जनता जानती है और ना वह जनता को क्योंकि वह कभी जनता के बीच आये ही नही है।फिलहाल इस धौरहरा लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय चुनाव मुकाबला होने के आसार है क्योंकि गठबंधन प्रत्याशी से सपा के कार्यकताओं को भी नही राष आ रहा है प्रत्याशी सपा तो सपा बसपा के कार्यकर्ताओ को नही भी नही राष आ रहा है और वह संतुष्ट नही है।अरशद सिददीकी के पिता इलियास आजमी भी यहा से चुनाव लड़े थे और जीते भी थे और उन्होंने भी जनता के लिये कुछ खास नही कर सके थे जब एक पिता जनता के लिये कुछ नही कर सके तो बेटा जनता के लिये क्या करेगे यह बात सोचने की जरूरत है और वह सोच समझकर प्रत्याशी को वोट दे जो विकास कर सके और जनता का साथ दे और जनता के सुख दुख मे जनता के साथ खड़ा हो ऐसे प्रत्याशी को वोट देना चाहिए।
लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और नेता गली गलियारों की खाक छानने लगे है।धौरहरा लोकसभा मे चुनाव बहुत अजीब स्थिति मे है जहाँ पर गठबंधन ने बाहरी प्रत्याशी को मैदान मे उतारा तो वही भाजपा ने अपने पुराने प्रत्याशी को एक बार पुनः उम्मीदवार बनाकर मैदान मे उतार दिया है।तो काग्रेंस कैसे मौका गवा देती जितिन प्रसाद को पहले लखनऊ से चुनाव लड़ने की खबरे आ रही थी फिर भाजपा मे जाने की चर्चाओं से बाजार गर्म हुआ था। फिर बाद मे जितिन प्रसाद भी धौरहरा से चुनाव मैदान मे उतर पड़े हालांकि की गठबंधन ने मुस्लिम चेहरा मैदान मे उतारा जरुर है लेकिन जनता को यह प्रत्याशी राश नही आ रहा है।यह कहना गलत ना होगा की धौरहरा लोकसभा क्षेत्र की एक बार फिर जितिन प्रसाद के हाथो मे कमान जा सकती है।

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